मुक्तक

नोटबंदी/अमरेश गौतम

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब,
गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब है।
कालाधन तो अब,आप जैसों से निकले हैं,
जो कि हर हाल में, देशहित में खराब है।

अमरेश गौतम

कवि /पात्रोपाधि अभियन्ता

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