Zindagi Ki Kahani… by Manoj Singh

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इस जिन्दगी की बस एक ही कहानी है,
कंही ठहरा तो कंही बहता हुआ पानी है,

न जाने कोई राज़  बहते हुये अश्कों का, 
कभी ख़ुशी तो कभी गम की निशानी है,

कभी वक़्त मिले चले आना किसी रोज़,
तुमसे बाते कुछ सुननी है’ कुछ सुनानी है,

अपना होके भी वो कभी अपना न हुआ,
जिसे कहते थे सब कि वो मेरी दीवानी है,

चंद सिक्कों के वास्ते  गंवाये सुकूँ सारे,
इंसानी फितरत की  ये कैसी नादानी है,

तवायफ की तरह रंग बदलती है वक़्त पे,
मतलबी सियासत की ये आदत पुरानी है.
~~~~~~~~~~~
मनोज सिंह”मन”
msinghthakur4@facebook.com

Manoj Singh

दिल मांग तो रही हो, संभाल पाओगी तुम, बस इतना ख़याल रहे , ये टूटता बहुत है, अपनों की बेरुखी से. - मनोज सिंह 'मन'

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