हम दुअओ में तुम्हे मांगना नही चाहते
पर तुम्हे ही पाने की सोचते है 

न जाने , कब हम इतने बेखबर हो गये
तुम्हे पाने के लिए हम इतने बेसबर हो गये।

Nisha nik

तमन्नाओं का शहर ,बाजार सब खुला था , बस एक हम ही फ़क़ीर ,खरीदार बन ना पाये ! -nisha nik''ख्याति''

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  • very nice..
    _____
    बहुत कर्ज हो गया है दर्द का मेरे सीने में आज,
    सोचता हूं मुहब्बत फिर से कर लूँ या दर्द वापस दे दूँ।

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