शराब

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आँखो में मेरे शराब है
पुरा बदन शब्ब है
अगर चाहत हो हुजूर को होठो से जाम चकने की
मयखाना -ए -शब्ब तैयार है।

Nisha nik

तमन्नाओं का शहर ,बाजार सब खुला था , बस एक हम ही फ़क़ीर ,खरीदार बन ना पाये ! -nisha nik''ख्याति''

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