Categories: ग़ज़लें

आ रहा था मज़ा जिंदगी का हमें

Published by

आ रहा था मज़ा जिंदगी का हमें,
शौक भारी पड़ा आशिकी का हमें,

दूर हम से हमारा सनम है अभी,
अब नही होश इस बे-खुदी का हमें,

मै जँहा भी गया,साथ गम चल दिये,
छोड़ सारा जँहा,आज हम चल दिये,

जिस गली मै चला हर गली बंद थी,
जिंदगी हर दफा मुझ पे क्यों तंग थी,

साथ मिलता नही है किसी का हमें,
जिंदगी भर रहा गम इसी का हमें,

ये मेरे हर्फ़ इस दिल के जज्बात है,
अब सहारा है बस मौशिकी का हमें,
~~~~~~~
मनोज सिंह”मन”

Manoj Singh

दिल मांग तो रही हो, संभाल पाओगी तुम, बस इतना ख़याल रहे , ये टूटता बहुत है, अपनों की बेरुखी से. - मनोज सिंह 'मन'

Leave a Comment

View Comments

  • पलकों को हमने,
    झुकने न दिया...
    तेरे खातिर हमने,
    जरा-सा मुस्कुरा दिया...
    .
    मेरी वफा को तुमने,
    इक पल में भुला दिया...
    जो किया दगा तुमने,
    तुझे खुद से मिटा दिया...
    .
    शीशा तोड़कर आशिकी का हमने,
    खुद को फिर अकेला कर दिया...
    मेरे इश्क को तुमने,
    इक मजाक बना दिया...
    #rahul_rhs

Recent Posts

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई …

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देखकर तसल्ली हुई… Read More

2 months ago

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची – राहत इन्दोरी

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर… Read More

2 months ago

नोटबंदी/अमरेश गौतम

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब, गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब… Read More

5 years ago

नोटबंदी/ अमरेश गौतम

गड्डी महलों की या न निकली, अपने बटुए से नोट पुराने चले गए। सुबह शाम… Read More

5 years ago