आँखे कभी हमारी मिल जाये तो

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जग हमे भुल जाये, पर तुम ना भुलाना कभी
आँखे कभी हमारी मिल जाये तो, आँखे ना चुराना कभी

हम जिन्दगी का सफ़र , साथ निभा तो नही सकते
पर जब साथ देने का समय आये तो हाथ ना छुङना कभी।

Nisha nik.

Nisha nik

तमन्नाओं का शहर ,बाजार सब खुला था , बस एक हम ही फ़क़ीर ,खरीदार बन ना पाये ! -nisha nik''ख्याति''

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  • मैं भी तनहा हूँ खुदा भी तनहा, वक़्त कुछ साथ गुज़ारा जाए
    ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए, इतना तो हुआ, कुछ लोग पहचाने गए, होश मुझे भी आ ही जायेगा मगर , पहले ! दिल तेरी याद से रिहा तो हो,
    हम्म जो तुम बोलो तो बिखर जाऐंगे,
    जो तुम चाहो संवर जाऐंगे,
    एय दुनियाँ वालों जरा
    मगर ये टूटना-जुड़ना हमें तकलीफ बहुत देता है

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