Ab Zara Zindagi Ko Bhi…

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यूं भी जी लूंगी बस जिये जाने तो दो
काटूंगी बलायें ज़रा लफ्जों पे धार आने तो दो

अंधेरा मुंह छुपा के भाग जायेगा 
बस ज़रा सूरज को घर आ जाने तो दो

मेरा तेरा तेरा मेरा करने से कुछ नही होता
बस ज़रा कुछ हमारा हो तो जाने दो

राह में कांटे है खाई है और पत्थर भी
बस ज़रा सरल सी एक राह आने तो दो

चलते चलते कभी तो थमेंगे हम भी
बस ज़रा वो खूबसूरत मोड़ आने तो दो

मैने तुमको तुमने मुझे आजमा लिया बहुत
अब ज़रा जिंदगी को भी ‘आभा’ आजमाने तो दो
आभा….

Abha Chandra

written from the core of my heart.......

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