Categories: ग़ज़लें

ए दिल जरा बता दे ,ये कैसे है मुनासिब

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ए दिल जरा बता दे ,ये कैसे है मुनासिब,
कि प्यार भी हो जाये,बर्बाद भी न हो हम,

अबतक नही हुआ जो,वो चाहता है तू क्यों,
यूँ नाम भी हो जाये, बदनाम भी न हो हम,

लो चल दिया है वो तन्हा आज छोड़कर के,
मुमकिन न हमसे होगा,नाशाद भी न हो हम,

~~~~~~~
“मन”
नाशाद~नाखुश

Manoj Singh

दिल मांग तो रही हो, संभाल पाओगी तुम, बस इतना ख़याल रहे , ये टूटता बहुत है, अपनों की बेरुखी से. - मनोज सिंह 'मन'

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