ग़ज़लें

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई …

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

आईना देखकर तसल्ली हुई
हमको इस घर में जानता है कोई

पक गया है शजर पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई

(तुम्हारे ग़म की डली उठाकर जुबां पे रख ली है देखो मैंने
ये कतरा कतरा पिघल रही है मैं कतरा कतरा ही जी रहा हूँ )

देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हमको पुकारता है कोई.

-गुलज़ार
शजर : पेड़, tree

गीतकार : गुलज़ार,
गायक : जगजीत सिंग,
संगीतकार : जगजित सिंग,
गीत संग्रह/चित्रपट : मरासिम (१९९९)

गुलज़ार साहब

Sampooran Singh Kalra (born 18 August 1934), known professionally as Gulzar or Gulzar Saheb , is an Indian lyricist, poet, author, screenwriter, and film director.

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