दुनियाँ से न्यारी मेरी गुलगुल…

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दुनियाँ से न्यारी मेरी गुलगुल
पापा की प्यारी मेरी गुलगुल

आँखों का ख़्वाब रातों की नींद 
दिन की तैयारी मेरी गुलगुल

सुकून-ए-दिल ओ चैन की साँस
हर गम पे भारी मेरी गुलगुल

हंसते हुये रंगों का गुलशन
रब की चित्रकारी मेरी गुलगुल

है वो मेरे दिल का क़रार भी
कभी बे-केरारी मेरी गुलगुल

ऐसा फूल है दिल के आँगन में
खुश्बू सी तारी मेरी गुलगुल

है ज़िंदा ‘सरु’ उसके ही दम से
ख्वाबों की ख़ुमारी मेरी गुलगुल

——–सुरेश सांगवान’सरु’

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