एक गुज़ारिश

फिर एक मंदिर ढहा है आज,
एक मस्जिद शहीद हुई है,
इंसानों की बस्ती मैं देखो आज,
फिर नफ़रत की जीत हुई है ||

मैं हिन्दू मैं मुसलमां,
मैं फ़लां, मैं फ़लां,
किस – किस नाम से पुकारूं तुझे,
ऐ इंसा, तू बता ||

सालों से साथ रहते रहते,
अचानक हमें ये क्या हुआ,
सहिष्णु यकायक असहिष्णु ‘औ’,
जिगरी दोस्त, दुश्मन हो गया ||

कभी खाई थीं सेवइयां और गुझियाँ,
हमनें जिनके साथ,
उन्ही के खून से रंग रहे हो देखो,
तुम अपने हाथ|

आँखें खोलो दोस्तों, मेरे भाइयों,
यूँ ना बहको,
ये तो सियासत का दलदल है यार,
तुम इसमें ना फिसलो ||

क्यों कर रहे हो ये क़त्ल-ओ-आम तुम,
और किसके कहने पर,
अरे, ये नेता तो अवसरवादी हैं,
दो मुट्ठी ख़ाक भी ना डालेंगे,
तुम्हारी क़ब्र पर ||

-आलोक श्रीवास्तव

Alok Meher Srivastava

I am a software engineer by profession and love to write poems and abstract poetries. I am writing for past 17 years and would love to write forever.

Leave a Comment

Recent Posts

जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना / शबीना अदीब

ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है,अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में,… Read More

1 month ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 2

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 2 (26 से… Read More

4 months ago

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई …

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देखकर तसल्ली हुई… Read More

4 months ago

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची – राहत इन्दोरी

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर… Read More

4 months ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 1

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 1 (1 से… Read More

4 months ago

नोटबंदी/अमरेश गौतम

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब, गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब… Read More

5 years ago