Categories: मुक्तक

इतिहास बताती हैं नदियाँ…

दो पाटों के अनुशासन में, मौजों की रवानी देखो,
कहीं लबालब,कहीं रिक्तता,पुलिनों की कहानी देखो।
सदियों के सुख-दुख की, इतिहास बताती हैं नदियाँ,
और कभी टूटा अनुशासन,सदियों तक वीरानी देखो।

अमरेश गौतम

कवि /पात्रोपाधि अभियन्ता

Leave a Comment

Recent Posts

जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना / शबीना अदीब

ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है,अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में,… Read More

1 month ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 2

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 2 (26 से… Read More

4 months ago

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई …

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देखकर तसल्ली हुई… Read More

4 months ago

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची – राहत इन्दोरी

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर… Read More

4 months ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 1

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 1 (1 से… Read More

4 months ago

नोटबंदी/अमरेश गौतम

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब, गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब… Read More

5 years ago