जलता हूं फिर भी नही मरता

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अग्निकुंड में डूब कर
भी “मैं” नहीं पिघलता

जलता हूं फिर भी नही मरता 

बार बार हर बार सदियों से मुझको मारते आ रहे हो
क्या कभी अपने राम को जिलाने की कोशिश करते हो ??

पुतले जलाने मात्र से
रावण मरा नहीं करते

रक्तबीज की तरह दस
शीश काट देते हैं
पर सैंकडों शीश उगाये
चौराहों घरों में घूमा करते हैं

रावण मारने से मरा नहीं करते
रावण काटने से कटा नहीं करते

हर घर में राम उठेंगे
तब ही रावण मरेंगे
हर दिल में राम जियेंगे
तब ही रावण कटेंगे

आओ प्रण करें हम सब राम बनेंगे
और रावण जैसे ज्ञानी से ज्ञान की सीख लेंगे

आभा चन्द्रा

Jalta Hoon Fir Bhi Nahin Marta

Abha Chandra

written from the core of my heart.......

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