जो नज़रो से एहतराम हमारा नही करते.

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जो नज़रो से एहतराम,हमारा नही करते,
उनसे गुफ्तगूं भी, हम गंवारा नही करते,

तरसते रहे दीवाने, उनके दीद को,मगर, 
जाने कैसे है वो,कभी नज़ारा नही करते,

वो देखते है ये,कि कोई देखता हो उन्हें,
जुल्फों को बेमतलब,वो संवारा नही करते,

कल मिले थे राह में,बस नज़रो से बात की,
ये वक़्त का तकाज़ा है,वो इशारा नही करते,

हुये है उमदराज़ हम,मगर तहज़ीब याद है,
कि बुर्जुगों को नाम लेके,पुकारा नही करते,
~~~~~~~~
मनोज सिंह”मन”

Manoj Singh

दिल मांग तो रही हो, संभाल पाओगी तुम, बस इतना ख़याल रहे , ये टूटता बहुत है, अपनों की बेरुखी से. - मनोज सिंह 'मन'

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