गीत

कारवां रुके नहीं…

संकल्प करके अब,चले हैं इस जहांन में,
पांव न रुकेंगे अब,किसी भी तूफान में।
तठस्थ हो लिखे चलो,कलम ये झुके नहीं,
कारवां रुके नहीं………

बुराइयों का अगर,कुछ समय तक मान है,
विचलित न हों राह से,अच्छाई से ये जहांन है।
घनघोर अंधेरा भले,दीपक की लौ बुझे नहीं,
कारवां रुके नही
कारवां रुके नही….

अमरेश गौतम

कवि /पात्रोपाधि अभियन्ता

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