ख़त तेरे नाम….

लिखना चाहा ख़त तुझे एक शाम,
क़लम हाथ में और बगल में जाम,
सोचा था शिक़ायत लिखूंगा, शिक़वे करूंगा, 
कुछ न कर सका, सो गया |

जगा तो बहुत देर हो चुकी थी,
तेरा एहसास कहीं था, पर तू नहीं थी,
तू नहीं है, इसका सुकूं था, पर,
तेरा एहसास भी क्यूँ है, ये नाकाबिल-ए-बर्दाश्त था |

अता फरमाई थी खुदा ने मुझे तन्हाई,
खुश था मैं कि तेरी याद भी न आई,
पर आज अचानक ये कौन सा मोड़ है ज़िन्दगी का,
कि ख़ुद-ब-ख़ुद आँख भर आई |

सुकूं की मौत मांगी थी मैंने खुदा से,
पर यहाँ भी तुझे चैन नहीं था,
मरने के बाद भी शायद,
कोई क़र्ज़ शेष था |

तुमसे कोई गिला नहीं मुझे,
बस एक इल्तिजा है,
मेरी तन्हाई मुझे लौटा दो,
मेरी रूह दुआ देगी तुझे |

Alok Meher Srivastava

I am a software engineer by profession and love to write poems and abstract poetries. I am writing for past 17 years and would love to write forever.

Leave a Comment

Recent Posts

जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना / शबीना अदीब

ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है,अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में,… Read More

4 months ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 2

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 2 (26 से… Read More

6 months ago

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई …

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देखकर तसल्ली हुई… Read More

6 months ago

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची – राहत इन्दोरी

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर… Read More

6 months ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 1

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 1 (1 से… Read More

6 months ago

नोटबंदी/अमरेश गौतम

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब, गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब… Read More

5 years ago