Khwahish Hai Is Dil Ki Ye…

Published by

ख्वाहिश है इस दिल की ये
ऐ वक़्त ज़रा तू पीछे चल।
मैं जी लूँ फिर से लम्हे वो
जिनमे रहती थी तुम हरपल।।

वो सुबह थी कितनी मीठी
वो लम्हे थे कितने प्यारे।
जिन लम्हों में सब हाल-ए-दिल
तुमने कह डाला था मुझसे।।

हर सुबह थी चहकी चहकी
और दिन भी सुहाने लगते थे।
हर रात थी अपनी तब तनहा
पर सपने अच्छे लगते थे।।

एक मौज सी रहती थी दिल में
एक दर्द-ए-दिल भी रहता था।
शायद वो पहला दर्द था जो
कुछ मीठा मीठा लगता था।।

तुम कितना लड़ती थी मुझसे
तुम शरमाया भी करती थी।
तेरी उन शोख अदाओं पर
धड़कन रुक जाया करती थी।।

अब दिल में दर्द नहीं कोई
न कोई मौज ही रहती है।
जीवन की अफरा तफरी में
बस साँसे चलती रहती हैं।।

अपनी साँसों में यादों में
महसूस मैं करता हूँ तुमको।
वो यादें ही सौगातें हैं
मैं ज़िंदा रखता हूँ उनको।।

न कोई गिला न शिकवा कोई
न कोई शिकायत है मुझको।
उन लम्हों, यादों की जानिब
मैं शुक्रिया करता हूँ तुझको।।

अमिताभ

Manager software engineer in MNC.

Leave a Comment

Recent Posts

जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना / शबीना अदीब

ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है,अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में,… Read More

2 months ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 2

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 2 (26 से… Read More

5 months ago

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई …

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देखकर तसल्ली हुई… Read More

5 months ago

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची – राहत इन्दोरी

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर… Read More

5 months ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 1

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 1 (1 से… Read More

5 months ago

नोटबंदी/अमरेश गौतम

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब, गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब… Read More

5 years ago