दर्द शायरी

किस दर जाऊ ?

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किस दर जाऊ ?
मुझे पता ही नही

किससे मांगू ?
मुझे समझ आता ही नही

सब अपनी रूह की सुनते है
मुझमे रूह बाकी भी है,
मुझे ये समझ आता ही नही।

-Nisha nik

Nisha nik

तमन्नाओं का शहर ,बाजार सब खुला था , बस एक हम ही फ़क़ीर ,खरीदार बन ना पाये ! -nisha nik''ख्याति''

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