“मौन” है जिनकी वाणी, “मौन” ही जिनका ध्यान,
“मौन” ही जिनकी साधना, वो हैं मेहेर बाबा “मेहेरवान”|

“मौन” रहकर ही दिया, उसने “मौन” का ज्ञान, 
“मौनावातर” के “मौन” ने, मिटाया सब अज्ञान|

“मौन” की महत्ता, औ “मौन” की विशालता,
“मौन” की मूक भाषा ही, “मौन” की परिभाषा|

“मौनावतार” के “मौन” में, छिपा जीवन का सार,
“मौन” के आवरण में ही लिपटा, जीवन का विस्तार।

“मौन” को समझने का प्रयास, करते हैं अज्ञान,
“मौनावातर” से प्रेम करो, होगा “मौन” का भान|

Alok Meher Srivastava

I am a software engineer by profession and love to write poems and abstract poetries. I am writing for past 17 years and would love to write forever.

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