ना लफ़्ज़ों का लहू निकलता है ना किताबें बोल पाती हैं,
मेरे दर्द के दो ही गवाह थे और दोनों ही बेजुबां निकले…

~aakaasshhh~

शायरी करनी है तो मुहब्बत कर... दिल के जख्म जरूरी है शायरी के लिए...

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