मेरे लफ़्ज़ों की पहचान अगर…

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मेरे लफ़्ज़ों की पहचान अगर कर लेता वो ‘फ़राज़’
उसे मुझसे नहीं खुद से मुहब्बत हो जाती…

~aakaasshhh~

शायरी करनी है तो मुहब्बत कर... दिल के जख्म जरूरी है शायरी के लिए...

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