Categories: ग़ज़लें

मिल के जाना तेरा/अमरेश गौतम’अयुज’

झुकी हुई नजरों से,मुस्कुराना तेरा,
बहुत याद आ रहा, मिल के जाना तेरा।

वो नजाकत औ शरारत, कि अब तक याद है, 
घुटनों पर ढ़ुड्डी रखकर, इतराना तेरा।

उदासियों का अब,नामो-निशान नहीं है,
दिल में बसा है,बच्चों सा,खिलखिलाना तेरा।

नजरों से कनखियाँ, चलाना वो दूर से,
सूनेपन में, जिन्दगी का,है नजराना तेरा।

अब भी उस गली में, जाता हूँ कभी-कभी,
जिस गली से कभी, था आना जाना तेरा।

बदला जो भी जिक्र, तुम्हारा मेरे हुजूर,
‘अयुज’ तो अब भी है दीवाना तेरा।

अमरेश गौतम

कवि /पात्रोपाधि अभियन्ता

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