मुक्तक

मित्र/मित्रता

1

दिल में कोई राज हो तो मत छुपाना,
धड़कन-ए-आवाज हो तो मत छुपाना।
मित्रता के हर कयास पर कायम रहूंगा मैं,
गर कोई आगाज़ हो तो मत छुपाना।

2

मुद्दतों हुए मिले हुए ऐ दोस्त, सोचता हूँ तू आज कैसा होगा,
दिन-ब-दिन बदलती दुनिया में, तेरा भी मिजाज कैसा होगा।
राग-द्वेष, फरेब,मतलबी,इनका दुस्प्रभाव तो नहीं,
ग़र नहीं तो इन सबके परे,तू खुशमिजाज कैसा होगा॥

अमरेश गौतम

कवि /पात्रोपाधि अभियन्ता

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