Thakan Zindagi Ki…

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थकन जिंदगी की और गहरी लग रही है
जाने क्यूं सांस कुछ ठहरी लग रही है
पिया तो है ज़हर मैने अमृत समझ कर
तासीर भी उसकी अब उल्टी लग रही है
बनाये थे दोस्त राह आसान करने को
ख़फा हुये वो किस्मत असर कर रही है….
आभा….

Abha Chandra

written from the core of my heart.......

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