बहुत ढूंढा मैने
पर
अब नही मिलते हैं

वो पुराने दिन
जो 
मीलों लम्बे होते थे

जिन दिनों में वक्त काटने के तरीके खोजते थे
और रातें मीलों तक
फैली हुआ करती थी

बहुत ढूंढा मैने
पर
अब नहीं मिलते हैं

दोस्तों के दोस्त भी जान से ज्यादा होते थे
काम भी सबके बस अपने नाम होते थे

बहुत ढूंढा मैने
पर
अब नहीं मिलते हैं

रातें लम्बी लम्बी और लम्बी हो जाती थी
दोपहर तक नींदे पूरी नहीं हो पाती थी

बहुत ढूंढा मैने
पर
अब नहीं मिलते हैं
आभा…

Abha Chandra

written from the core of my heart.......

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