यादें तेरी भूलु कैसे मुझको तुम बतला जाओ,
बैठु में आँखें बंद करके और पास मेरे तुम आ जाओ।

जब सोंचु में तुमको ये दूरी मुझको डँसती है,
इस दूरी के मौसम को आकर के तुम झुठला जाओ।

-इन्दर गुन्नासवाला

इन्दर मीणा

संघर्षमय जीवन ही आनंदित जीवन है।

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