ये संगदिलों की दुनिया है…

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ये संगदिलों की दुनिया है; यहाँ संभल के चलना ग़ालिब;
यहाँ पलकों पे बिठाया जाता है; नज़रों से गिराने के लिए…

~ Mirza Ghalib

~aakaasshhh~

शायरी करनी है तो मुहब्बत कर... दिल के जख्म जरूरी है शायरी के लिए...

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