ज़िन्दगी का अतीत…

निःशब्द शान्ति का आवरण ओढ़े ज़िन्दगी, तलाशती है अपने अतीत को,
दूर बहुत दूर जाती है पीछे, एक झलक देखने अपने आप को ||

ज़िन्दगी ने देखा, उसपर धूल जमी थी, पर घाव हरा था, 
सूखने की प्रतीक्षा में शायद, आँखे खुली रह गयी थीं ||

ज़िन्दगी एक क्षण वहाँ रुकी, आंसू बहाए, फिर,
वर्तमान में यूं लौट आई, मानो वहाँ कभी थी ही नहीं ||

पर ज़िन्दगी का वर्तमान में आना, एक दिलासा मात्र था,
अपने आपको समझाने का प्रयास, कि वो सत्य नहीं था ||

सत्य कभी बदलता नहीं, वर्तमान भी उसी अतीत का अंग है,
ज़िन्दगी को स्वीकार करनी पड़ेगी ये सच्चाई, कि अतीत से विच्छेद मुमकिन नहीं ||

अतीत के कन्धों पर चढ़कर, वर्तमान यहाँ तक पहुंचा है,
अतीत के ताने-बाने में ही, वर्तमान कहीं छुपा है ||

वर्तमान को अतीत से अलग, एक पहचान बनानी होगी,
कोई अतीत उसे बेध न पाए, एक ऐसी दीवार बनानी होगी ||

कि, ज़िन्दगी वर्तमान में जीने का नाम है,
जहाँ अतीत, वर्तमान हुआ, वहीँ ज़िन्दगी की शाम है ||

Alok Meher Srivastava

I am a software engineer by profession and love to write poems and abstract poetries. I am writing for past 17 years and would love to write forever.

Leave a Comment

Recent Posts

जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना / शबीना अदीब

ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है,अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में,… Read More

1 month ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 2

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 2 (26 से… Read More

4 months ago

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई …

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देखकर तसल्ली हुई… Read More

4 months ago

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची – राहत इन्दोरी

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर… Read More

4 months ago

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi – Part 1

वक़्त शायरी | समय शायरी | Waqt Shayari in Hindi - Part 1 (1 से… Read More

4 months ago

नोटबंदी/अमरेश गौतम

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब, गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब… Read More

5 years ago